Saturday, July 28, 2018

जादुई तोता हिंदी कहानी


PARROT STORY IN HINDI

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जादुई तोता हिंदी कहानी

 parrot story in hindi, kids story in hindi, पहाड़ों पर एक तोता रहता था यह एक साधारण तोता नहीं था बल्कि एक जादुई तोता था इस तोते में ऐसी जादुई शक्ति थी कि जिससे यह किसी भी पत्ते को अगर अपनी चोंच से छू देता था तो वह सोने में बदल जाते थे


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एक दिन एक शिकारी शिकार करता हुआ वहां पर आया तभी उसने एक तोते को पेड़ पर बैठे हुए देखा तो उस पेड़ की कुछ पत्तियां सोने में बदली हुई थी उसने सोचा कि अगर मैं तोता पकड़ लूं तो मुझे बहुत ही फायदा होगा और इतने साल बीत गए मुझे शिकार करते हुए पर मैंने कभी ऐसा नहीं देखा


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फिर शिकारी ने एक जाल फेंका और थोड़ी देर बाद देखा कि तोता उसमे आकर फस गया और वह तोते को लेकर अपने घर चला गया जब वह घर पहुंचा तो तोते की चोंच से पत्ते छुआ जैसी पत्ते को छुआ है वह भी सोने में बदल गया शिकारी ने सोचा कि अगर मैं यह तोता अपने पास रखता हूं

 तो कुछ दिनों बाद सिपाही राजा को बता देंगे और यह तोता मुझ से ले लेंगे क्यों ना मैं यह तोता राजा को ही बेच दूं और फिर बेचकर बहुत सारा धन मिल जाएगा यही सोचकर शिकारी राजा के पास गया और कहने लगा कि जादुई तो होता है जब राजा ने यह बात सुनी तो उसने तोता ले लिया और अपने पिंजरे में रख लिया


और सभी को कहा कि इसकी पूरी देखभाल करें अगर इसे कुछ हो गया तो मै सजा दूंगा थोड़ी देर बाद वहां पर मंत्री जी आए और कहने लगे कि यह तोता कहां से लेकर आए हैं आप, तब राजा ने सारी बात मंत्री को बताई इस पर मंत्री ने कहा कि ऐसा कैसे हो सकता

मैंने अपनी पूरी जिंदगी में ऐसा नहीं देखा है बहुत कहने पर राजा ने मंत्री से पूछा कि क्या करना चाहिए मंत्री ने कहा कि हमें इस तोते को आजाद करना चाहिए क्योंकि ऐसा कोई भी पक्षी नहीं है जो सोने में किसी चीज को बदल दे और इस प्रकार राजा बात मानकर तोता उड़ा दिया गया

parrot story in hindi, kids story in hindi, जब जादुई तोता उड़ा तो उसने कहा कि यह संसार तो बेवकूफ से भरा है एक बेवकूफ शिकारी था जिसने मुझे राजा को बेच दिया और एक ही राजा बेवकूफ है जिसने मुझे छोड़ दिया यह कहकर तोता वहां से चला गया

written by vaibhav singh

CHILD STORY IN HINDI

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कौआ और रानी की कहानी

child story in hindi, story in hindi, hindi story, एक जंगल में एक बरगद का बहुत बड़ा पेड़ था उस पेड़ पर एक कौआ अपनी पत्नी के साथ खोखला बना कर बैठा था बरगद के पेड़ के तने में एक खोखला था जिसमें कहीं से एक काला नाग आ कर रहने लग गया था कुछ समय बाद को एक ही पत्नी ने अंडे दिए दोनों बारी-बारी से जाकर अंडों की रखवाली करते थे.


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 कुछ दिन बाद उन अंडों से बच्चे निकल आए एक दिन को कौआ भोजन की खोज में बाहर गया हुआ था वह की पत्नी बैठकर बच्चों के साथ बैठी थी मौका पाकर नाग बच्चों को खाने के लिए आया कौआ की पत्नी ने बड़ी साहस से उसका सामना किया और वह डर कर भाग गया


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जब कोवे  वापस आया तो कौआ की पत्नी ने उसे सारी बात बताई थी कि आज नाग उनके बच्चों को खाने के लिए आया था जंगल में कुछ दूर के पेड़ के नीचे एक लोमड़ी रहती थी लोमड़ी बहुत ही होशियार और बुद्धिमान थी.

 कोवे की बहुत अच्छी दोस्त थी को उसके पास गया और बड़े उदास मन से कहने लगा कि हम अपना घोंसला छोड़ कर यहां से चले जाएंगे नहीं तो सांप हमारे बच्चों को खा जाएगा लोमड़ी बोली इससे तो अच्छा है कि तुम यहीं रह कर इस मुसीबत का सामना करो को वह बोला तुम ही कोई उपाय बताओ

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लोमड़ी को एक उपाय आया वह बोली यहां से कुछ दूर नदी में रानी रोज नहाने के लिए आती है और अपने गहने उतार कर वही रख देती है तुम चुपके से उस की एक माला लाकर सांप के बिल के पास रख देना जब रानी के सैनिक तुम्हारे पीछे-पीछे आएंगे तो तुम माला रख कर अपने घोंसले में छुप जाना

सैनिक जब माला को सांप के बिल के पास देखेंगे तो वह सांप को मार डालेंगे इसे तुम्हारी मुसीबत दूर हो जाएगी अगले दिन कोवे ने ऐसे ही किया जब रानी नहाने लगी तो वो रानी की एक माला को लेकर उड़ा रानी चिल्लाने लगी रानी के सैनिक कोवे के पीछे पीछे भाग, माला सांप के बिल के पास सैनिकों ने सोचा कि साथ ही उस माला को लेकर आया है उन्होंने अपने भालो से सांप को मार डाला और सांप मर गया


child story in hindi, story in hindi, hindi story, कौआ पहले की तरह अपना और अपने परिवार के साथ हंसी खुशी वहां रहने लग गया किसी भी मुसीबत से भागना उस मुसीबत का हल नहीं होता मुसीबत से लड़ना ही मुसीबत का हल होता है.
written by vaibhahv singh

जलपरी की सच्ची कहानी


जलपरी की सच्ची कहानी, kids kahani

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जलपरी की सच्ची कहानी

kids kahani, kids story hindi, new story in hindi, hindistory, जलपरी की सच्ची कहानी, एक समय की बात है एक समुंद्र में एक बहुत सुंदर जलपरी रहती थी वह आधी राजकुमारी थी और आधा उसका शरीर मछली का था वह बहुत सुंदर थी और हमेशा सोचती थी कि मेरी शादी एक सुंदर राजकुमार के साथ हो और मैं भी एक सुंदर महल में रहूं.


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वह समुंदर से बाहर निकल कर जीना चाहती थी लेकिन समुंद्र से बाहर वह जी नहीं सकती थी क्योंकि मछली अगर जल्द से बाहर जाएगी तो वह मर जाएगी एक दिन एक सुंदर राजकुमार अपने जहाज में समुंद्र की सहर करने आया सैर करते करते उसका जहाज समुंद्र की लहरों में फस गया और समुंद्र में गिर गया राजकुमार समुंद्र में गिरा और वह राजकुमार जलपरी के पास पहुंच गया


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वहां एक बड़ा मगरमच्छ था वह राजकुमार को खाना चाहता था पर जलपरी ने कहा तुम इसको छोड़ दो मत खाओ और इसे जीवित करके वापस इसके देश भेज दो मगरमच्छ नहीं माना और कहने लगा मैं इसको नहीं छोडूंगा जलपरी अपने राजा के पास गई और उससे विनती करने लगी कि इस राजकुमार को जीवित कर के इसके देश भेज दो

राजा बोला मैं इसके बदले कुछ लूंगा जलपरी ने कहा बताओ आप क्या लोगे जलपरी थोड़े दिन बाद इंसान बनने वाली थी और इंसानों के बीच रहने वाली थी राजा ने कहा अगर तुम इस राजकुमार को जिंदा करना चाहती हो तो तुम्हें अपना पूरा जीवन ही बिताना होगा जलपरी राजकुमार से प्यार करने लगी थी

उसके लिए वह अपना जीवन भी दे देना चाहती थी उसने राजा की बात मान ली और वह विष पी लिया जिससे वह पूरी इस जीवन में यही पर मछली बन कर रहती समुंद्र के राजा ने राजकुमार को जीवित कर दिया और वह उसे समुंद्र के किनारे छोड़ आया

जब राजकुमार के सैनिक उसे ढूंढने आए तो उन्हें राजकुमार मिल गया और वह उसे अपने देश वापस ले गए जब राजकुमार को होश आया तब वह फिर उसे समुंद्र के किनारे आया और कहा मेरा जीवन जिसने बचाया है मैं उससे एक बार मिलना चाहता हूं समुंद्र के पास ही जंगल में दो खरगोश रहते थे

उनको खरगोश का और जलपरी की आपस में बहुत अच्छी दोस्ती थी जलपरी तुंहें सब कुछ बताती थी जब राजकुमार वापस आया तो खरगोश होने उसे पूरी बात बताइए कि कैसे जलपरी में अपना सारा जीवन समुंद्र को देकर तुम्हे जीवन दान दिया है
 kids kahani, kids story hindi, new story in hindi, hindistory, राजकुमार जलपरी से मिलना चाहता था उसमें उसको आवाज दी और जलपरी समुंद्र के ऊपर आ गई अब रोज राजकुमार जलपरी से मिलने आता और उससे बहुत देर तक बात करता और फिर वापस चला रहा था इस तरह जलपरी के प्यार की कहानी शुरू भी हुई और खत्म भी कभी नहीं हुई.
Written by vaibhav singh

नन्ही परी और छोटी रानी

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नन्ही परी और छोटी रानी

August 31, 2015 - परिकथाएं
विक्रमगढ़ नामक एक राज्य था जिसमे एक राजा राज्य करता था। विक्रमगढ़ के राजा की दो रानियाँ थीं। बड़ी रानी कम सुन्दर थी और छोटी रानी अत्यधिक सुन्दर थी जिसके के कारण राजा छोटी रानी को अधिक प्रेम करते थे। एक दिन छोटी रानी के कहने पर राजा बड़ी रानी पर बहुत नाराज़ हुआ। तो बड़ी रानी रोती हुई महल से जंगल की और चली गयी।
एक नदी के किनारे, अनार के पेड़ के नीचे बैठ कर वो ज़ोर ज़ोर से रो रही थी कि तभी एक नन्ही सी परी प्रकट हुई। उस परी ने रानी से उसके रोने का कारण पूछा। बड़ी रानी ने सब कुछ सच सच बता दिया। तब परी बोली, ” ठीक है, मैं जैसा कहती हूँ, वैसा ही करो, न ज़्यादा न कम। पहले इस नदी में तीन डुबकी लगाओ और फिर इस अनार के पेड़ से एक अनार तोड़ो।” और ऐसा कह कर परी गायब हो गयी।
बड़ी रानी ने वैसा ही किया जैसा कि परी ने कहा था। जब रानी ने पहली डुबकी लगाई तो उसके शरीर का रंग और साफ़ हो गया, सौंदर्य और निखर गया। दूसरी डुबकी लगाने पर उसके शरीर में सुंदर कपड़े और ज़ेवर आ गये। तीसरी डुबकी लगाने पर रानी के सुंदर लंबे काले घने बाल आ गये। इस तरह रानी बहुत सुंदर लगने लगी। नदी से बाहर निकल कर रानी ने परी के कहे अनुसार अनार के पेड़ से एक अनार तोड़ा। उस अनार के सारे बीज सैनिक बन कर फूट आये और रानी के लिये एक तैयार पालकी में उसे बिठा कर राज्य में वापस ले गये।
राजमहल के बाहर शोर सुन कर राजा ने अपने मंत्री से पता करने कहा कि क्या बात है। मंत्री ने आकर ख़बर दी कि बड़ी रानी का जुलूस निकला है। राजा ने तब बड़ी रानी को महल में बुला कर सारी कहानी सुनी और पछताते हुये इस बार छोटी रानी को राज्य से बाहर निकल जाने का आदेश दिया।
छोटी रानी ने पहले ही परी की सारी कहानी सुन ली थी। वो भी राज्य से बाहर जा कर अनार के पेड़ के नीचे, नदी किनारे जा कर रोने लगी। पिछली बार जैसे ही इस बार भी परी प्रकट हुई। परी ने छोटी रानी से भी उसके रोने का कारण पूछा। छोटी रानी ने झूठ मूठ बड़ी रानी के ऊपर दोष लगाया और कहा कि उसे बड़ी रानी महल से बाहर निकाल दिया है। तब परी बोली, ” ठीक है, मैं जैसा कहती हूँ, वैसा ही करो, न ज़्यादा न कम। पहले इस नदी में तीन डुबकी लगाओ और फिर इस अनार के पेड़ से एक अनार तोड़ो।” और ऐसा कह कर परी गायब हो गयी।
छोटी रानी ने ख़ुश हो कर नदी में डुबकी लगाई। जब रानी ने पहली डुबकी लगाई तो उसके शरीर का रंग और साफ़ हो गया, सौंदर्य और निखर आया। दूसरी डुबकी लगाने पर उसके शरीर पर सुंदर कपड़े और ज़ेवर आ गये। तीसरी डुबकी लगाने पर रानी के सुंदर लंबे काले घने बाल आ गये। इस तरह रानी बहुत सुंदर लगने लगी। जब छोटी रानी ने ये देखा तो उसे लगा कि अगर वो तीन डुबकी लगाने पर इतनी सुंदर बन सकती है, तो और डुबकिय़ाँ लगाने पर जाने कितनी सुंदर लगेगी। इसलिये, उसने एक के बाद एक कई डुबकियाँ लगा लीं। मगर उसका ऐसा करना था कि रानी के शरीर के सारे कपड़े फटे पुराने हो गये, ज़ेवर गायब हो गये, सर से बाल चले गये और सारे शरीर पर दाग़ और मस्से दिखने लगी। छोटी रानी ऐसा देख कर दहाड़े मार मार कर रोने लगी। फिर वो नदी से बाहर आई और अनार के पेड़ से एक अनार तोड़ा। उस अनार में से एक बड़ा सा साँप निकला और रानी को खा गया।
इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि दूसरों का कभी बुरा नहीं चाहना चाहिये, और लोभ नहीं करना चाहिये।
written by vaibhav singh

बैल पालक और मेघ बुनाई


बैल पालक और मेघ बुनाई परी की प्रेम कहानी

       न्योलांग एक बैल पालक था , वह गरीब था , पर एक खुशमिजाज वाला युवा था , उस के साथ  मात्र एक बुढ़ा बैल और जमीन को जोड़ने में प्रयुक्ल हल था । न्योलांग रोज खेत में परिश्रम करने जाता था , घर वापस आने पर खुद खाना बनाता था और कपड़ा धौता था , जीवन काफी दूभर था , किन्तु  कौन जाने कि एक दिन  उस के जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन आया ।
   उसी दिन , बाहर मेहनत करने के बाद न्योलांग जब घर लौटा , तो उसे बड़ा आश्चर्य हुआ कि उस का कमरा बहुत साफ सुथरा कर दिया गया , गंदे कपड़ों को भी साफ धुलाई कर अच्छी तरह तह कर दिया गया , मेज पर गर्म गर्म खाना परोस किया गया , सुगंधित तरकारी महक रहा । न्योलांग बड़ा ताज्जुब हो आवाक् रह गया , यह  तो क्या हुआ ,क्या देव लोक से कोई आया हो , माथे को जोर दबाने पर भी  न्यो लांग को यह पहेली नहीं सुझ सकी ।
   तभी से लगातार कई दिन इसी तरह का समान करिश्मा हुआ रहा , न्योलांग का धैर्य खो बैठा , उस ने इस का साफ पता लगाने की ठान ली । एक दिन , सामान्य दिन की ही तरह सुबह सुबह ही न्योलांग घर से  निकला , लेकिन वह थोड़ी दूर चलने के बाद ही वापस घर के पास छुप गया और घात में लग कर घर पर नजर रखने लगी ।
   थोड़ी देर में एक रूपवती युवती आई , वह न्योलांग के घर में प्रवेश कर घर- गृहस्थी में जुट गई , अपनी कौतुहल नहीं रोक सका , तो न्योलांग घात की जगह से बाहर निकल कर युवती के सामने आयी और पूछाः यह सुन्दर लड़की , क्या तुम मुझे बता सकती हो कि क्यों मेरी गृहस्थी में मदद कर रही हो ?  न्योलांग की आवाज पर युवती चौंक उठी , वह लज्जा के साथ धीमी आवाज में बोलीः मेरा नाम चीन्यु है , तुम्हारे कठिन जीवन पर तरस आई हूं , तो मदद के लिए आई हूं ।  सुन कर न्योलांग को बड़ी खुशी हुई और उस ने साहस के साथ पूछाः मेरे साथ शादी करो , हम दोनों साथ साथ मेहनत करेंगे और साथ साथ रहेंगे । चीन्यु ने हां भरा , उसी दिन दोनों विवाहबंधन में बंधे हुए । इस के बाद रोज न्योलांग खेत पर जाता था , और चीन्यु घर में कपड़ों की बुनाई करती थी और गृहस्थी चलाती थी , उन का जीवन बहुत सुखचैन से चल रहा था ।
   इस तरह कुछ साल बीत चुके , दोनों के एक लड़का और एक लड़की भी हुए , परिवार बड़े आनंद के साथ चल रहा ।
   सहसा एक दिन आकाश में काला बादल बिछा , तेज हवा चली , स्वर्ग लोक से दो सेनापति उतर कर न्योलांग के घर आए , उन्हों ने न्योलांग को बताया , चीन्यु स्वर्ग लोक के सम्राट की पोती थी , जो मेघ की बुनाई का काम संभालती है , लेकिन  कुछ साल पहले वह घर को छोड़ कर चली गई ,इन सालों में उस की तलाश बराबर हो रही थी । दोनों स्वर्ग सेनापति जबरदस्ती से चीन्यु को स्वर्ग लोक वापस ले गए ।
    अपनी पत्नी को जबरदस्ती से स्वर्ग लोक में ले जाते देख कर न्योलांग लाचार भी था और असीम दुख में बह भी गया । दोनों नन्हें बच्चों को गोद में थामे उस ने चीन्यु को वापस ले आने और पारिवारिक मिलन कराने का संकल्प किया , पर जग के लोग किस तरह स्वर्ग जा सकते है ?
   न्योलांग की दुख और परेशानी को देख कर सालों से साथ रहे उस बुढ़ा बैल का मुंह खुला और उस ने मानव की आवाज में कहाः तुम मेरा वध कर दे , मेरी चमड़े को अपने शरीर पर ओढ़ दे , तभी तुम आकाश में उड़ने के योग्य़ हो सके और स्वर्ग  पहुंच कर चीन्यु से मिल सके । न्योलांग किसी भी तरह अपने प्यारे बुढ़ा बैल को मारने को तैयार नहीं था , बुढ़ा बैल ने उसे बार बार मनाया , कोई दूसरा चारा नहीं पाने पर  उसे विवश हो कर बड़ी दुखी से बुढा बैल की मांग पर काम करना पड़ा ।
    बुढ़ा बैल की चमड़े को शरीर पर औढ़े अपने दो बच्चों को दो थैलों पर उठाकर न्य़ोलांग स्वर्ग लोक की ओर उड़ा , लेकिन स्वर्ग भवन कड़े पहरे में था , गरीब जग लोग पर किस का जरा भी ध्यान नहीं गया , स्वर्ग सम्राट ने न्योलांग और चीन्यु की मुलाकात से साफ इंकार कर दिया ।
   न्योलांग और दो बच्चों के बारंबार विनति अनुरोध पर सम्राट ने अंत में उन की संक्षिप्त मुलकात की इजाजत दी । नजरबंद हुई चीन्यु को अपने पती और बच्चों से मिलने पर बड़ी खुशी भी हुई और बड़ी दुख भी । मुलाकात का समय जल्दी ही खत्म हुआ, स्वर्ग सम्राट ने चीन्यु को अलग ले जाने की हुक्म दी , वियोग में दुखे न्योलांग अपने दो बच्चों को हाथ से पड़के चीन्यु का पीछा करने लगे , कई बार पांव के बल  गिरे और फिर उछल कर उठ खड़े हो गए और पीछा जारी रखने लगे , देखते ही देखते पास आए , लेकिन कठिर मिजाजी स्वर्ग रानी ने अपने बालों से एक स्वर्ण कैशबंध उतार कर न्योलांग और चीन्यु के बीच एक रेखा खींची , जिस ने एक चौड़ी नदी  आकाशगंगा का रूप ले लिया , बड़ी दुख की बात थी कि न्योलंग और चीन्यु तभी से आकाश गंगा की दोनों किनारे पर अलग हो गई और केवत एक दूसरे की ओर ताक सकते । दोनों पती पत्नी को चीनी पंचांग के अनुसार हर सार की सातवें महीने की सातवीं तारीख को आपस में एक बार मिलने की अनुमति दी गई , उसी दिन लाखों की संख्या में मंगलसूचक मैगपाइयों ने उड़ आए  अपने शरीरों से आकाश गंगा पर एक लम्बा पुल बनाया , जिस से न्योलांग और चीन्यु के परिवार का एक बार मिलन हो पाता था ।

Written by vaibhav singh

रानी परी की कहानी


रानी परी की कहानी, pari ki kahani

PARI KI KAHANI

रानी परी की कहानी

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pari ki kahani
pari ki kahani, रानी परी को किसी ने भी नहीं देखा था, रानी परी उस गुफा की और रहती थी जिस जगह पर कोई नहीं जाता था रानी परी के बारे में कोई नहीं जनता था क्योकि उस जगह पर कोई नहीं आता था गुफा जांगले के बीच में थी ऐसा बिलकुल भी नहीं लगता था की किसी ने उस गुफा को कभी देखा हो,


उस परी का नाम रानी परी था रानी परी के साथ एक और परी थी उसका नाम इच्छा परी था इच्छा परी से अगर तुम जो चाहो वो मांग सकते थे वो सबकी इच्छा पूरी कर सकती थी दोनों परी ने कभी इंसान को नहीं देखा था ये दोनों परिया कहा से आयी थी इसके बारे में कोई नहीं जानता था



एक दिन की बात है एक जादूगर उस जंगल में अपना जादू का अभ्यास कर रहा था वो अपने जादू को बहुत ही अच्छा करना चाहता था तभी उसकी नज़र उस गुफा की और पड़ी उसने भी कभी उस गुफा को नहीं देखा था वह जादूगर गुफा के अंदर गया तो देखा की गुफा तो बहुत सूंदर है

उस गुफा के अंदर सभी समान मौजूद थे ऐसा बिलकुल भी नहीं लग रहा था की वो कोई गुफा है बल्कि ऐसा लग रहा था की वो एक महल है जादूगर चारो और देखने लगा उसे वह पर कोई नज़र नहीं आ रहा था क्योकि दोनों परी उस वक़्त वह पर नहीं थी इसलिए उसे वह पर कोई नहीं मिला.

जादूगर यह जानने की कोशिश कर रहा था की यहां पर कौन रहता है पर उसे कुछ पता नहीं चला तभी इच्छा परी गुफा के अंदर गयी और उसने जादूगर को देखा जादूगर को देख उसने उससे पूछा की तुम कौन हो और यहां पर क्या कर रहे हो   

जादूगर मुड़ा और देखा की उसके सामने एक परी है अब जादूगर ने कहा की में तुमसे शादी करूँगा और इस गुफा में हम दोनों साथ में रहेंगे यह सुनकर इच्छा परी को गुस्सा आ गया और उसने उस जादूगर पर अपना जादू चलाया पर जादूगर ने उसका जादू चलने नहीं दिया और उसे पकड़ लिया

इच्छा पर को पकड़ा जा चुका था उधर दूसरी और रानी परी उस जंगल में घूम रही थी तभी उसकी मुलाकात एक राजकुमार से हुई जोकि वह पर रास्ता भटक चुका था और रात भी होने वाली थी राजकुमार को रानी परी ने देखा और दोनों ने बहुत सी बाते की, जब बहुत समय हो गया तो रानी परी राजकुमार को अपने साथ गुफा में ले गयी तभी उसकी नज़र इच्छा परी पर गयी जिसको पकड़ा जा चुका था

जादूगर उस वक़्त गुफा के छोर पर गया हुआ था इच्छा परी ने सबकुछ बता दिया और रानी परी ने उसको छुड़ा लिया तीनो ने मिलकर एक योजना बनाई और उस जादूगर का इंतज़ार करने लग गए जब जादूगर आया तो जादूगर ने देखा की वह पर इच्छा परी नहीं है दोनों परी ने उस पर अपना जादू चलाया और उसे पकड़ लिया

pari ki kahani, राजकुमार और रानी परी की शादी हो गयी और जादूगर का सारा जादू खत्म कर दिया गया और अब वह जादूगर कुछ भी नहीं कर पा रहा था वह जादूगर अब उनकी सेवा ही कर सकता था राजकुमार उस रानी परी के साथ उस गुफा में ही रहने लगा क्योकि रानी परी की यह शर्त थी की अगर वो उससे शादी करती है तो उसे उनके साथ ही रहना पड़ेगाअगर आपको यह कहानी पसंद आयी है तो आगे भी शेयर करे और हमे बताये अगर आप हमे कोई कहानी भेजना चाहते है तो आप हमे भेज सकते है.
Written by vaibhav singh

जादूगर की हिंदी कहानी

HINDI KAHANI

जादूगर की हिंदी कहानी

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hindi kahani, एक बार एक जादूगर ने पूरे शहर पर अपना जादू चलाकर शहर को पूरी तरह से काबू करने की सोची जादूगर ने कहा की अगर कोई भी मेरी बात नहीं मानेगा तो उसे सजा मिलेगी पूरा शहर उस जादूगर के कोफ़ से डरा हुआ था कोई भी कुछ नहीं कर पा रहा था सभी लोग डरे हुए थे


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जादूगर ने अपनी शक्ति से सभी लोगो पर अपना जादू कर रखा था वह अपने जादू से सभी लोगो से काम करवाता और उन पर अपना हुक्म चलाता लोगो को कुछ देर के लिए ही होश आता और फिर वासे ही सब लोग बन जाते लोग इस जाल से नहीं निकल पा रहे थे


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तभी वहा पर एक राहगीर आया और दूसरे नगर जाने का रास्ता पूछने लगा पर कोई भी उस राहगीर पर ध्यान नहीं दे रहा था तभी कुछ देर के लिए सभी लोग होश में आ गए ऐसा हर रोज होता था पर फिर कुछ देर बाद सभी उस जादू के वश में हो जाते थे

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जब सभी ने राहगीर को देखा तो लोग उससे मदद मांगने लग गए की हमे जादूगर के इस जाल से बचा लो जादूगर ने हम पर बहुत अत्यचार किये है जिससे हम सभी लोग परेशान है और कुछ भी नहीं कर पा रहे तभी उस राहगीर ने पूछा की में इसमें क्या कर सकता हु

तभी लोगो ने कहा की अगर तुम जादूगर की लड़की से शादी कर लो तो हमे इस समस्या से छुटकारा दिला सकते हो लेकिन जादूगर इस बात के लिए तभी मानेगा जब तुम उसकी शर्त को पूरा कर दोगे जादूगर की शर्त है की अगर कोई भी आदमी गर्म तेल में से होकर चलेगा तभी उसके साथ मेरी बेटी की शादी होगी

तुम बहुत ही नेक इंसान हो और इस प्रक्रिया को वो ही पूरा कर सकता है जो सच्चा हो और उसे भगवान् पर पूरा यकीन हो, अगर तुम भगवान् पर यकीं करते हो तो तुम इस काम को पूरा कर सकते हो इस बात को सुनकर वो राहगीर मान गया और जादूगर के आने के बाद उसने अपनी बात रखी       
इसके बाद जादूगर ने राहगीर की बात मान ली और गर्म तेल की तैयारी की गयी जिसमे उसे चलना था उसके बाद राहगीर ने गर्म तेल पर चलना शुरू कर दिया और भगवान् का नाम लेता गया इस तरह वो रास्ता भी राहगीर ने पूरा कर लिया और जादूगर खुश हो गया और अपनी बेटी की शादी के लिए तैयार हो गया जैसा की जादूगर ने कहा था

जादूगर ने अपनी बेटी की शादी कर दी और जादूगर ने कहा की अगर तुम कुछ माँगना चाहते हो तो मांग सकते हो तभी राहगीर ने कहा की में इस नगर को मांगता हू, और इस पर राज करना चाहता हू जादूगर खुश हो गया और कहा की तुम यहां पर रह सकते हो और में यहां से चला जाता हू

hindi kahani, जादूगर के जाने के बाद सभी लोग पहले की तरह ठीक हो गए और राहगीर भी उसी गांव में ठहर गया सभी लोग राहगीर की शादी होने की खुसी में नाच-गाना शुरू कर दिया और सभी लोग जादूगर के जादू से आज़ाद हो गए अगर आपको यह कहानी पसंद आयी है तो आगे भी शेयर करे और हमे भी बताये
written by vaibhav singh

राजमहल की हिंदी कहानी

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